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लंका मैदान गेट नंबर-4 से फूलनपुर क्रॉसिंग होते हुए स्टेशन रोड तक बदहाली, दशहरे तक सड़क दुरुस्त कराने का आश्वासन भी अधूरा
गाजीपुर। शहर की जर्जर सड़कों की समस्या दूर होने का नाम नहीं ले रही है। लंका मैदान गेट नंबर-4 के सामने से गुरु कृपा मैरिज हॉल होते हुए फूलनपुर रेलवे क्रॉसिंग पार कर स्टेशन रोड तक जाने वाली सड़क वर्षों से गड्ढों में तब्दील है। दुर्गा पूजा और दशहरा का पर्व नजदीक है। लंका मैदान में ऐतिहासिक रामलीला के आयोजन को लेकर तैयारियां भी शुरू हो गई हैं, जहां आसपास के कई गांवों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसके बावजूद सड़क की बदहाली दूर नहीं हो सकी है। ऐसे में रामलीला और दशहरा मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, प्रशासन की ओर से दशहरे तक सड़क को आवागमन योग्य बनाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। लोगों का कहना है कि जब शहर में बड़े धार्मिक आयोजन होने जा रहे हैं, तब भी इस प्रमुख मार्ग की मरम्मत नहीं हो पाना जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
दो विभागों के जिम्मे सड़क, फिर भी नहीं सुधरी हालत
स्थानीय लोगों के अनुसार, फूलनपुर से स्टेशन रोड तक का हिस्सा नगर पालिका परिषद के अधीन है, जबकि लंका मैदान गेट नंबर-4 से गुरु कृपा मैरिज हॉल होते हुए फूलनपुर रेलवे क्रॉसिंग पार करने वाला मार्ग लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधीन आता है। दोनों मार्गों की बदहाली के कारण लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क की समस्या कोई नई नहीं है। कई वर्षों से लोग इस मार्ग की मरम्मत और स्थायी निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें राहत नहीं मिल सकी है। दुर्गा पूजा के दौरान शहर में जगह-जगह पंडाल सजते हैं और दशहरा मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। ऐसे में सड़क की खराब स्थिति दुर्घटनाओं और जाम की आशंका भी बढ़ा सकती है।
नौ करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) के अनुसार, इस सड़क के निर्माण के लिए करीब नौ करोड़ रुपये का बजट प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, लेकिन अभी तक धनराशि स्वीकृत होकर प्राप्त नहीं हुई है। बजट मिलने के बाद ही निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि, स्थानीय लोगों का सवाल है कि स्थायी निर्माण के लिए बजट का इंतजार अपनी जगह है, लेकिन जब तक धनराशि नहीं मिलती, तब तक सड़क को कम से कम इतना दुरुस्त क्यों नहीं किया जा रहा कि लोग सुरक्षित तरीके से आवागमन कर सकें? खासकर त्योहारों और रामलीला मेले के मद्देनजर अस्थायी मरम्मत की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
दस साल बाद लोगों ने खुद संभाली थी जिम्मेदारी
सड़क की बदहाली को लेकर पिछले दिनों समाजसेवी विवेक सिंह शम्मी ने भी आवाज उठाई थी। लंबे समय तक शिकायतों और मांगों के बावजूद समाधान नहीं मिलने पर उन्होंने अपनी टीम के साथ स्थानीय लोगों से चंदा जुटाकर सड़क के गड्ढों को भरने का प्रयास किया था। इसके लिए गिट्टी, बालू और सीमेंट का इस्तेमाल किया गया था।
लेकिन बारिश के कारण लोगों के श्रमदान से की गई मरम्मत भी टिक नहीं पाई और सड़क की स्थिति फिर खराब हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब नागरिक अपने स्तर से सड़क सुधारने का प्रयास कर चुके हैं, तब भी स्थायी समाधान नहीं निकलना निराशाजनक है।
दशहरा मेला करीब, अब तो जागे प्रशासन
अब दशहरा मेला नजदीक है और लंका मैदान की रामलीला में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में जर्जर सड़क से होकर श्रद्धालुओं, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को गुजरना पड़ेगा। सड़क पर बने गड्ढे किसी अप्रिय घटना का कारण न बनें, इसके लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाना जरूरी है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि नौ करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर शासन स्तर से जल्द निर्णय कराया जाए और स्थायी निर्माण होने तक नगर पालिका परिषद तथा लोक निर्माण विभाग अपने-अपने हिस्से की सड़क को तत्काल आवागमन योग्य बनाएं। लोगों का कहना है कि फिलहाल सड़क की मरम्मत कर गड्ढे भर दिए जाएं, ताकि दशहरा और रामलीला मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना न करना पड़े।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन दशहरा मेले से पहले इस महत्वपूर्ण मार्ग को चलने योग्य बना पाएगा, या फिर हर साल की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को गड्ढों भरी सड़क से ही गुजरना पड़ेगा?


















