गाजीपुर। महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से लाए गए नारी शक्ति बंदन अधिनियम के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया है। सोमवार को गाजीपुर में राज्यसभा सांसद डॉ. संगीता बलवंत की अगुवाई में एक महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। सम्मेलन के माध्यम से महिलाओं ने विपक्षी दलों के खिलाफ विरोध दर्ज कराते हुए अधिनियम के गिर जाने पर नाराजगी जताई।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता में राज्यसभा सांसद डॉ. संगीता बलवंत ने कहा कि प्रधानमंत्री की सोच रही है कि महिलाओं को पंचायत से लेकर संसद तक बराबर भागीदारी मिले। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार की ओर से नारी शक्ति बंदन अधिनियम लाया गया था, जिसके तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था। उन्होंने कहा कि सभी को उम्मीद थी कि यह विधेयक सर्वसम्मति से पारित होगा और देश की महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व का बड़ा अधिकार मिलेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने एकजुट होकर इस विधेयक का विरोध किया और इसे पास नहीं होने दिया। डॉ. बलवंत ने कहा कि 16 अप्रैल का दिन देश के इतिहास में महिलाओं के सम्मान के रूप में दर्ज हो सकता था, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण यह अवसर खो गया। उन्होंने कहा कि यह महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ कदम है और इससे विपक्ष का महिला विरोधी चेहरा सामने आया है।
राज्यसभा सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री की सोच है कि जिस तरह पंचायतों में महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिला है, उसी तरह संसद और विधानसभाओं में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़े। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं यह कल्पना कर रही थीं कि संसद के द्वार से बड़ी संख्या में महिलाएं प्रवेश करेंगी और नीति निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगी।
सम्मेलन में उपस्थित महिलाओं ने भी इस अधिनियम के गिरने पर विपक्षी दलों की आलोचना करते हुए कहा कि बहाने बनाकर महिलाओं को मिलने वाले अधिकारों का विरोध किया गया है। कार्यक्रम में भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं और स्थानीय पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।





















