गाजीपुर, 27 अप्रैल 2026।जनपद में चल रहे फॉर्मर रजिस्ट्री (किसान आईडी) के विशेष अभियान को लेकर सोमवार को मुख्य विकास अधिकारी कक्ष में प्रेसवार्ता आयोजित की गई। यह प्रेसवार्ता जिला विकास अधिकारी संतोष कुमार वैश्य की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
प्रेसवार्ता में मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि जनपद में कुल 5,71,518 कृषक पंजीकृत हैं, जिनमें से 4,42,482 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री (किसान पहचान पत्र) अब तक बन चुकी है। यह कुल पंजीकृत किसानों का 77.45 प्रतिशत है। वहीं अभी भी 1,29,036 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री बनना शेष है।
उन्होंने बताया कि शासन के निर्देश पर 6 अप्रैल 2026 से जनपद की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष कैंप लगाकर किसानों की फार्मर रजिस्ट्री मौके पर ही बनाई जा रही है। 8 अप्रैल 2026 के शासनादेश के अनुसार अब सभी किसानों की फार्मर रजिस्ट्री बनाई जा रही है, चाहे वे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी हों या नहीं।
सीडीओ ने बताया कि भविष्य में उर्वरक, बीज, कृषि रक्षा रसायन, कृषि यंत्र, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम किसान योजना की अगली किस्त सहित कृषि से जुड़ी अन्य योजनाओं का लाभ फार्मर रजिस्ट्री होने पर ही मिलेगा। इन योजनाओं में उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, लघु सिंचाई, गन्ना तथा दुग्ध विभाग की योजनाएं भी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि 6 अप्रैल से चल रहे इस विशेष अभियान के दौरान अब तक 50 हजार से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री बनाई जा चुकी है। किसान यह कार्य ग्राम पंचायतों में लगाए जा रहे कैंपों के अलावा सहज जनसेवा केंद्रों पर भी करा सकते हैं। इसके साथ ही किसान मोबाइल एप डाउनलोड कर स्वयं भी अपनी फार्मर रजिस्ट्री बना सकते हैं।
किसानों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि किसान मोबाइल, आधार कार्ड और खतौनी लेकर अपने नजदीकी जनसेवा केंद्र या गांव में लगे कैंप में पहुंचकर प्राथमिकता के आधार पर फार्मर रजिस्ट्री बनवा लें।
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि कई किसान रजिस्ट्री प्रक्रिया के दौरान मोबाइल पर आए ओटीपी को लेखपाल, पंचायत सहायक, सचिव या जनसेवा केंद्र संचालक को बताने में झिझक रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकारी कर्मचारियों को अपनी उपस्थिति में ओटीपी बताने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए, क्योंकि वे किसानों का कार्य कर रहे हैं। किसी प्रकार की आशंका होने पर किसान ग्राम प्रधान, कोटेदार, लेखपाल, पंचायत सचिव या कृषि विभाग के कर्मचारियों से संपर्क कर सकते हैं।
प्रेसवार्ता में पराली प्रबंधन को लेकर भी जानकारी दी गई। बताया गया कि फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ मिट्टी की उर्वरता को भी नुकसान पहुंचता है। इस वर्ष जनपद में कूड़ा, खरपतवार और कांस-सरपत में आग लगने की 136 घटनाएं सामने आई हैं। जांच में पाया गया कि इनमें से 125 घटनाओं में अज्ञात व्यक्तियों द्वारा आग लगाई गई, जबकि 6 घटनाएं शॉर्ट सर्किट या ट्रांसफार्मर में आग लगने से, 2 घटनाएं खड़ी फसल में बिजली के शॉर्ट सर्किट से, 1 घटना अज्ञात कारण से तथा 2 घटनाएं कूड़ा जलाने की पाई गईं।
सभी घटनाएं सैटेलाइट के माध्यम से रिकॉर्ड की गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि गेहूं के फसल अवशेष (भूसा) जलाने की कोई घटना सामने नहीं आई है।
उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाने पर जुर्माने का प्रावधान है। 2 एकड़ से कम क्षेत्र वाले किसानों पर 5000 रुपये, 2 से 5 एकड़ तक 10000 रुपये तथा 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र पर 30000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
किसानों से अपील की गई कि किसी भी प्रकार के फसल अवशेष, कूड़ा-करकट या खरपतवार में आग न लगाएं। ऐसा करने से पर्यावरण और मिट्टी दोनों को नुकसान होता है। यदि फसल अवशेष जलाने की पुष्टि होती है तो संबंधित के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
इस अवसर पर उप निदेशक कृषि तथा मीडिया बंधु भी उपस्थित रहे।





















