गाजीपुर।लोक आस्था और सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा इस बार गाजीपुर जिला कारागार की चारदीवारी के भीतर भी पूरी श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। जेल में निरुद्ध महिला बंदियों ने इस पावन पर्व को पूरी निष्ठा से मनाकर यह संदेश दिया कि आस्था की ज्योति किसी सीमा में नहीं बंधती।
जिला कारागार में कुल 39 महिला बंदियों में से 6 महिला व्रती बंदियों ने छठ व्रत रखा है। जेल प्रशासन की देखरेख में कारागार परिसर के अंदर ही एक अस्थायी पोखरे (टेंपररी तालाब) का निर्माण कराया गया है, जहां व्रती बंदियां परंपरागत विधि-विधान से डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगी।

पूरे जेल परिसर में भक्ति और उत्साह का माहौल बना हुआ है। छठ गीतों की गूंज और महिलाओं के पारंपरिक व्रत-पूजन से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया है।

जेल अधीक्षक जगदंबा प्रसाद दुबे के निर्देशन में यह आयोजन कराया गया, जिसे कारागार प्रशासन की सकारात्मक और मानवीय पहल के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि “छठ पूजा लोक आस्था का पर्व है। जेल में रह रही महिला बंदियों को इस पर्व को मनाने का अवसर देकर हमने उनके मनोबल और धार्मिक स्वतंत्रता को सम्मान दिया है।”

व्रती महिला बंदियों ने भावुक होकर बताया कि वे भगवान सूर्यदेव और छठी मइया से अपने पुत्रों की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि तथा जीवन में शांति की कामना कर रही हैं।
कारागार में इस आयोजन से यह संदेश गया कि भले ही कैदी दीवारों के भीतर हों, लेकिन आस्था, भक्ति और उम्मीद की किरणें उन तक भी समान रूप से पहुँचती हैं।













