खबर गाजीपुर से है, जहाँ प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार का बड़ा मामला सामने आया है। जिले की 6 मेडिकल एजेंसियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के ड्रग इंस्पेक्टर बृजेश मौर्या ने जांच रिपोर्ट तैयार कर सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है।
औषधि विभाग ने इस गंभीर प्रकरण की जानकारी उच्चाधिकारियों के माध्यम से जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को भी सौंप दी है। जांच में यह तथ्य सामने आया कि संबंधित फर्मों ने रांची, झारखंड स्थित मेसर्स शैली ट्रेडर्स (प्लॉट नं. 187/188, टुपूदान इंडस्ट्रियल एरिया, हटिया, रांची) से बड़ी मात्रा में न्यू पेसेडाइल कफ सिरप (कोडीन युक्त), 100 एमएल की खरीद की। लेकिन निरीक्षण के दौरान न तो इनके पास स्टॉक मिला और न ही खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड प्रस्तुत किए गए।
6 मेडिकल एजेंसियाँ आईं रडार पर
औषधि विभाग की जांच में जिन छह फर्मों पर कार्रवाई की गई है, उनमें—
1. मेसर्स अंश मेडिकल एजेंसी, जखनियां गोविंद — प्रो. अमित सिंह
2. मेसर्स शुभम फार्मा, खानपुर — प्रो. निलेश कुमार श्रीवास्तव
3. मेसर्स नित्यांश मेडिकल एजेंसी, मंझनपुर — थाना भुड़कुड़ा
4. मेसर्स मौर्या मेडिकल स्टोर, गोराबाजार, पीरनगर — प्रो. दयाराम सिंह
5. मेसर्स स्वास्तिक मेडिकल एजेंसी, सैदपुर — प्रो. शरवंश
6. मेसर्स राधिका मेडिकल एजेंसी, नंदगंज — प्रो. राहुल यादव
जांच में खुलासा हुआ कि इन एजेंसियों ने रांची की सप्लाई फर्म से लगभग 11.50 करोड़ रुपये की 78 हजार बोतलें कोडीन सिरप खरीदीं, लेकिन न तो माल मिला और न ही बिक्री के दस्तावेज।
धारा 22(1)(डी) के तहत कार्रवाई
औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 22(1)(डी) के तहत संबंधित फर्मों की खरीद–बिक्री पर रोक लगाते हुए पूरे मामले की रिपोर्ट आयुक्त (औषधि), वाराणसी मंडल को भेज दी गई है।
औषधि विभाग द्वारा पुलिस को दी गई तहरीर में—
उपायुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, लखनऊ का पत्र
मेसर्स शैली ट्रेडर्स, रांची द्वारा की गई सप्लाई का विवरण संबंधित मेडिकल एजेंसियों से जुड़े अभिलेख जीपीएस लोकेशन की फोटो प्रतिसंलग्न की गई है।
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कोडीन नारकोटिक श्रेणी की दवा है, जिसका उपयोग केवल डॉक्टर की सलाह पर किया जाता है। इसके क्रय-विक्रय की अनुमति केवल वैध लाइसेंसधारी फर्मों को है और सटीक अभिलेख रखना अनिवार्य है।
लेकिन कोडीन युक्त सिरप का नशे के रूप में दुरुपयोग होता है, इस कारण खुले बाजार में इसकी बिक्री कानूनी रूप से प्रतिबंधित है। कुछ एजेंसियाँ अधिक लाभ कमाने के लिए अवैध रूप से इसकी खरीद–बिक्री करती हैं, जो कानूनन गंभीर अपराध है।
फिलहाल औषधि प्रशासन, पुलिस विभाग और जिला प्रशासन मिलकर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गए हैं













