सवाल : जब आपने पत्रकारिता की शुरुआत की, तब हालात कैसे थे?
जवाब : वर्ष 1978 का दौर था, आपातकाल के बाद का समय। चारों तरफ नाराजगी, गुस्सा और आक्रोश का माहौल था। लगभग सभी राजनीतिक दल एकजुट थे और सरकार के लिए यह संकट का समय था। ऐसे माहौल में पत्रकारिता एक बड़ी जिम्मेदारी बन जाती थी।
सवाल : अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तब अधिक आसान थी या आज?
जवाब : अभिव्यक्ति का अधिकार हमेशा रहा है, लेकिन उसकी भी एक सीमा होती है। वह सीमा हमें स्वयं तय करनी होती है। सही बात और सच्ची घटना को न तो कोई रोक सकता है और न ही हमेशा दबा सकता है।
सवाल : आपने पत्रकारिता को ही अपना पेशा क्यों चुना?
जवाब : लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत करने और अपनी पत्रकारिता के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाने के उद्देश्य से इस क्षेत्र को चुना। कठिन परिश्रम, स्वच्छ छवि और ईमानदारी से काम करते हुए एक किसान के बेटे ने न केवल अपनी पहचान बनाई बल्कि समाज के लिए एक उदाहरण भी प्रस्तुत किया, जिसे लोग आज भी याद करते और सराहते हैं।

सवाल : गाजीपुर में पत्रकारिता का आपका अनुभव कैसा रहा?
जवाब : धार्मिक नगरी गाजीपुर, जिसे ‘लहुरी काशी’ भी कहा जाता है, में पत्रकारिता की शुरुआत करना मेरे लिए गर्व की बात रही। यहां की समस्याओं को उठाने, क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर कराने और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में अपने योगदान से मैं पूरी तरह संतुष्ट रहा।

सवाल : अपने दौर के खास लोगों के साथ आपका अनुभव कैसा रहा?
जवाब : सभी राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं से मधुर और अच्छे संबंध रहे। सभी का सहयोग मिला। धरतीपुत्र स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव, रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, पूर्व राज्यपाल श्री कलराज मिश्र, पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय रामनरेश यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय कल्पनाथ राय, पूर्व मंत्री कालीचरण यादव, पूर्व मंत्री स्वर्गीय कैलाश यादव, स्वर्गीय रामकरन यादव ‘दादा’ सहित अनेक सांसदों और विधायकों से आत्मीय संबंध रहे।

सवाल : इनमें से किसी के साथ आपका संबंध विशेष रूप से करीब रहा?
जवाब : सभी से अच्छे संबंध रहे, लेकिन स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के साथ रिश्ता बेहद खास रहा। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आज भी उस आत्मीय संबंध को पूरी गरिमा के साथ निभा रहे हैं।

सवाल : आज की पत्रकारिता और 70 के दशक की पत्रकारिता में क्या अंतर है?
जवाब : 70 के दशक में पत्रकारों की चुनौतियां अलग थीं और आज की चुनौतियां अलग हैं। उस समय केवल अखबार ही समाचार का मुख्य माध्यम थे, रेडियो भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। आज अखबार, रेडियो, दूरदर्शन, न्यूज चैनल और न्यूज पोर्टल के बीच अपनी पहचान बनाना सबसे बड़ी चुनौती है। आज समाचार प्रेषण के कई साधन हैं, जबकि उस समय केवल टेलीफोन ही सहारा था और साधारण फोटो भेजना भी बेहद कठिन काम था।
सवाल : सोशल मीडिया पत्रकारों के लिए मददगार है या नुकसानदायक?
जवाब : नुकसान कम और फायदा ज्यादा है, बशर्ते इसका सही और जिम्मेदार उपयोग किया जाए।
सवाल : नए और युवा पत्रकारों के लिए आपका क्या संदेश है?
जवाब : आज युवा पीढ़ी में पत्रकारिता को लेकर क्रेज बढ़ा है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। आर्थिक चुनौती हमेशा से रही है। ऐसे में धैर्य, ईमानदारी और निरंतर मेहनत ही सफलता की कुंजी है।




















