गाजीपुर। त्वचा संबंधी बीमारियों में एक्जिमा (Eczema) एक आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या है। यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है। एलोपैथिक चिकित्सा में जहाँ इसका अस्थायी उपचार मिलता है, वहीं होम्योपैथी में इस रोग का जड़ से इलाज संभव माना जाता है।

क्या है एक्जिमा?
एक्जिमा या एटोपिक डर्मेटाइटिस त्वचा की ऐसी स्थिति है जिसमें त्वचा रूखी, खुजलीदार और लाल हो जाती है। यह संक्रामक नहीं है, लेकिन लंबे समय तक बना रह सकता है। ठंड के मौसम में इसका प्रकोप बढ़ जाता है क्योंकि इस दौरान त्वचा की नमी कम हो जाती है।
होम्योपैथी में एक्जिमा का इलाज कैसे होता है?
एलोपैथिक उपचार में अक्सर स्टेरॉयड और मलहम दिए जाते हैं, जो अस्थायी राहत तो देते हैं लेकिन लंबे समय में दुष्प्रभाव भी छोड़ सकते हैं।
इसके विपरीत, होम्योपैथिक दवाएं शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को भीतर से मज़बूत कर रोग की जड़ पर असर डालती हैं। तीन से छह महीने के नियमित उपचार से अधिकांश रोगियों को उल्लेखनीय राहत मिलती है
डॉ. पीयूष कान्त सिंह बताते हैं कि “होम्योपैथी में इलाज केवल त्वचा तक सीमित नहीं है, बल्कि रोग के मूल कारण प्रतिरक्षा असंतुलन को संतुलित करता है।”
एक्जिमा के प्रमुख लक्षण
लगातार खुजली और लालपन
त्वचा पर छोटे फफोले या पपड़ी
रूखी और मोटी त्वचा
खुजलाने पर जलन और घाव
बच्चों में सिर, घुटने और कोहनी के आसपास रैशेज
एक्जिमा के कारण
अनुवांशिक प्रवृत्ति
अत्यधिक ठंडा या नम वातावरण
धूल-मिट्टी, परागकण या जानवरों से एलर्जी
मानसिक तनाव
हार्मोनल बदलाव (विशेषकर महिलाओं में)
डिटर्जेंट, नकली साबुन या केमिकल युक्त लोशन का उपयोग
एक्जिमा की रोकथाम के उपाय
प्रतिदिन गुनगुने पानी से स्नान करें और हल्का मॉइश्चराइज़र लगाएं।
तनाव से बचें, योग और ध्यान करें।
बहुत गर्मी या पसीने से बचें।
सूती कपड़े पहनें और सिंथेटिक कपड़ों से परहेज़ करें।
धूल, मिट्टी और एलर्जेन से दूर रहें।
डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी क्रीम या स्टेरॉयड न लगाएं।
डॉ. पीयूष कान्त सिंह का कहना है “एक्जिमा का सही इलाज तभी संभव है जब उसे सिर्फ त्वचा रोग न मानकर शरीर की अंदरूनी असंतुलन की स्थिति के रूप में देखा जाए।होम्योपैथी में रोगी के मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक पहलुओं का अध्ययन कर दवा दी जाती है, जिससे बीमारी दोबारा न उभरे।”
एक्जिमा भले ही लंबे समय तक रहने वाली समस्या हो, लेकिन होम्योपैथिक चिकित्सा से इसे नियंत्रित और समाप्त किया जा सकता है।यह उपचार पूरी तरह सुरक्षित, प्राकृतिक और बिना किसी साइड इफेक्ट के होता है।
डॉ. पीयूष कान्त सिंह के अनुसार – “एक्जिमा का इलाज धैर्य, अनुशासन और नियमित होम्योपैथिक दवा सेवन से संभव है।”













