
(गाजीपुर): सिधौना गांव की रामलीला अपनी उत्कृष्टता और विशिष्टता के लिए देशभर में ख्याति अर्जित कर रही है। गांव के सांस्कृतिक मनोरंजन के लिए सत्तर वर्ष पूर्व रामलीला शुरू किया गया था। सिधौना रामलीला सेना के दक्षिणी कमांड मुख्यालय, बाबा विश्वनाथ धाम वाराणसी सहित मायानगरी में मुंबई में अपने सफल मंचन से प्रसिद्धि हासिल कर रही है। जानकी धाम नेपाल और सीता जन्मस्थली बिहार में मंचन प्रस्तावित है। सिधौना गांव के हर परिवार में रामलीला के कलाकार मौजूद है। आज सिधौना गांव में चार दर्जन से अधिक रामलीला कलाकार कई मंचों की शोभा बढ़ाते है। रामलीला मंचन के दौरान कलाकारों द्वारा बोले गए संवाद की अपनी अलग विशेषता है।

रामायण के सात अलग अलग ग्रंथों से निचोड़ कर सिधौना रामलीला के संवाद लिखे गए है। हिंदी, अवधी, भोजपुरी, मैथिली के भाषाओं के साथ चित्रकूट की लोक भाषा का समावेश किया गया है। वाल्मीकि रामायण के मूल कथा को लेकर रामचरित मानस सहित अन्य पांच और ग्रंथों से रामलीला के संवाद लिखे गए है। आमजन को सुलभता से समझने और सुगमता से आत्मसात करने के लिए संवाद में लोक भाषाओं, लोकोक्तियों, कहावतों आदि का ज्यादा प्रयोग किया गया है। राधेश्याम रामायण, रामरस सुधा, दर्पण, बसुनायक रामायण, कम्ब रामायण, रंगनाथ रामायण और भावार्थ रामायण के कुछ प्रसंगों के अच्छे अंश को संकलित कर सिधौना रामलीला के संवाद बनाये गए है।

जीवंत अभिनय संग संतोष मिश्रा के नेतृत्व में आदर्श रामलीला समिति गांव में रामलीला करती है। भव्य मंचन व आकर्षक प्रस्तुतिकरण के साथ रंगमंच कला परिषद के अध्यक्ष कृष्णानंद सिंह देशभर में अलग अलग स्थलों पर लीला मंचन के माध्यम से मानवीय मूल्यों का प्रचार प्रसार एवं संयुक्त परिवार की अवधारणा को प्रचारित करते है।




















