धान, उड़द, मसूर और आलू की फसलें जलमग्न, प्रशासन ने कराया सर्वे शुरू
गाजीपुर, 1 नवम्बर। पिछले कई दिनों से जिले में रुक-रुककर हो रही तेज और मध्यम बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेतों में पककर तैयार हुई धान की फसल अब पूरी तरह से प्रभावित हो चुकी है। किसान जो अपनी फसल काटकर खेतों में सुखा रहे थे, वे अब बारिश से बर्बाद हो गए हैं। इससे किसानों के चेहरों पर मायूसी और चिंता की लकीरें साफ झलक रही हैं।
सिर्फ गाजीपुर ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल में पिछले 48 घंटे से लगातार बारिश जारी है। खेतों में पानी भर जाने से फसलें जलमग्न होकर सड़ने के कगार पर हैं। धान के साथ-साथ उड़द, मसूर और आलू जैसी फसलें भी प्रभावित हुई हैं। कई किसानों ने बताया कि वे इस फसल की बिक्री से अपनी बेटियों की शादी का खर्च उठाने की योजना बना चुके थे, मगर बारिश ने उनकी सारी उम्मीदें तोड़ दी हैं। अब किसान सरकार और प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
कृषि विभाग के अनुसार, जिले में लगभग 47 हजार किसानों का फसल बीमा कराया गया है। लेकिन बीमा कंपनियों से समय पर मुआवजा मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है, ऐसे में किसान जिला प्रशासन से आपदा राहत के तहत सहायता की उम्मीद कर रहे हैं।
इस संबंध में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) दिनेश कुमार ने बताया कि पिछले कई दिनों से हो रही बारिश से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। प्रशासन ने लेखपालों और राजस्व टीमों को गांवों में सर्वे के लिए भेजा है, जो अगले तीन से चार दिनों में अपनी रिपोर्ट देंगे। रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाने की कार्यवाही की जाएगी।
किसानों ने कहा कि यदि समय रहते सरकार से मदद नहीं मिली तो आगामी रबी सीजन की खेती भी प्रभावित हो सकती है।













