गाज़ीपुर।मानसिक तनाव को दूर रखने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए योग को सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है। यही कारण है कि अब गाज़ीपुर के जिला जेल और राजकीय संप्रेक्षण गृह (बाल सुधार गृह) में योग कोहै नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाया गया है।
यहां न केवल पारंपरिक योग कराया जा रहा है, बल्कि इसे और रोचक बनाने के लिए जुंबा और फिल्मी म्यूज़िक को भी शामिल किया गया है। सप्ताह के अंत में आयोजित होने वाले योग सत्रों में बंदी और बाल अपचारी बड़े उत्साह से हिस्सा लेते हैं।
शुक्रवार को आयोजित विशेष सत्र के दौरान बाल सुधार गृह के प्रांगण में फिल्मी गीत “सात समुंदर पार तेरे पीछे-पीछे मैं आ गई” की धुन पर योगाभ्यास करते हुए बाल अपचारी नजर आए। वहीं, जिला जेल में भी बंदियों ने जुंबा म्यूज़िक की ताल पर योगाभ्यास किया।

कार्यक्रम का संचालन होम्योपैथिक कॉलेज की योग प्रशिक्षक प्रतीक्षा पांडे की देखरेख में हुआ। उन्होंने बताया कि “जुंबा और फिल्मी संगीत पर योग कराने के बाद से बंदियों की योग में रुचि तेजी से बढ़ी है। अब सैकड़ों बंदी और बाल अपचारी नियमित रूप से योग करने लगे हैं।”
इस पहल का उद्देश्य न केवल शारीरिक स्वास्थ्य सुधारना है, बल्कि मानसिक शांति, आत्मअनुशासन और सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा देना है।अधीक्षक, राजकीय संप्रेक्षण गृह ने बताया कि इस तरह की पहल से बंदियों और बाल अपचारियों में अनुशासन, संयम और आत्मविश्वास की भावना विकसित हो रही है। यह प्रयास उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करेगा।













