कैसे हुआ फर्जीवाड़ा
हाथीखाना निवासी अजीत कुमार कपड़े की दुकान चलाते हैं।उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट गौरव गुप्ता ने उन्हें मैनपुर निवासी चंदन सिंह और बैंक मैनेजर विनोद से लोन दिलाने के नाम पर जोड़ा।तीनों ने मिलकर अजीत के जीएसटी दस्तावेज, यूजर आईडी और पासवर्ड हासिल कर लिया।अजीत के जीएसटी अकाउंट से 113.65 करोड़ रुपये का फर्जी आउटवर्ड सप्लाई दिखाते हुए बिलिंग की गई।आरोपियों ने जीएसटी आईडी, ईमेल और मोबाइल नंबर बदलकर पूरा फर्जीवाड़ा अंजाम दिया।
जांच में खुलासा
16 अप्रैल 2025 को CA ने अजीत को बताया कि उसके जीएसटी से भारी बिलिंग की गई है।
23 मई को राज्य कर विभाग की टीम ने दुकान पर जांच की।
सामने आया कि अजीत के नाम पर राज्य से बाहर की फर्मों से लेनदेन दर्ज था, जबकि असल में इतनी बिक्री हुई ही नहीं थी।
कानूनी कार्रवाई
पीड़ित अजीत ने पहले पुलिस और साइबर सेल में शिकायत की लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।इसके बाद उन्होंने अदालत में गुहार लगाई।मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले की गंभीरता देखते हुए चंदन सिंह,गौरव गुप्ता (CA), औरबैंक मैनेजर विनोदके खिलाफ बीएनएस की धारा 319(2) और 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया।पुलिस ने अब रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।














