गाजीपुर।नगर की टूटी-फूटी सड़कों से उठती धूल और गड्ढों में डूबे रास्तों ने आखिरकार लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। गाजीपुर को गड्ढामुक्त शहर बनाने की मांग को लेकर शुरू हुआ हस्ताक्षर अभियान अब एक व्यापक जनआंदोलन का रूप लेता दिख रहा है।

बुधवार को अभियान के दूसरे दिन करीब 1600 नागरिकों ने हस्ताक्षर कर इस मुहिम का समर्थन किया। विशेष बात यह रही कि इस दिन जिला अधिवक्ता संघ भी आंदोलन के साथ खुलकर सामने आया और कचहरी परिसर में सामूहिक रूप से हस्ताक्षर कर प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराज़गी दर्ज कराई।
वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश चंद्र श्रीवास्तव ने बेबाकी से कहा — “गाजीपुर नगर की सड़कों की ऐसी दयनीय हालत पहले कभी नहीं थी। सीवर कार्य पूरा हुए एक वर्ष से अधिक समय हो गया, फिर भी एक भी सड़क का समुचित पुनर्निर्माण नहीं हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों से मुकदमे के सिलसिले में आने वाले वादी-प्रतिवादी जब शहर की सड़कों पर कदम रखते हैं, तो उन्हें सबसे पहले प्रशासन की नाकामी दिखाई देती है। यह गाजीपुर के लिए दुर्भाग्य है कि लोग कहने लगे हैं — ‘शहर से अच्छी तो गांव की सड़कें हैं।’”
अभियान के संयोजक विवेक कुमार सिंह ‘शम्मी’ ने बताया कि यह मुहिम तब तक जारी रहेगी जब तक 10,000 नागरिकों के हस्ताक्षर पूरे नहीं हो जाते। उन्होंने कहा — “हम सिर्फ सड़कों की मरम्मत की मांग नहीं कर रहे, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की भी मांग कर रहे हैं। यह जनता का अधिकार है कि उसे मूलभूत सुविधाएँ बिना आंदोलन किए मिलें।”
अधिवक्ता संघ के सदस्यों एडवोकेट बृजेश राय, एडवोकेट रणजीत सिंह, एडवोकेट राजेश राम, एडवोकेट वीरेश सिंह समेत कई वरिष्ठ वकीलों ने भी हस्ताक्षर कर आंदोलन को अपना समर्थन दिया। वहीं, स्थानीय नागरिकों में चंद्रिका यादव सहित अनेक लोगों ने भागीदारी निभाई।
अब यह अभियान नगर के विभिन्न मोहल्लों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर भी चलाया जाएगा। लगातार बढ़ते जनसमर्थन को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि गाजीपुर की जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, परिणाम चाहती है।














